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लैंगिक भेदभाव को मिटाने का संकल्प लिए हुए मास्टर रामबीर अपने पथ पर निरंतर अग्रसर हैं। लैंगिक भेदभाव की जड़ों को मिटाने के लिए वह अपने गांव में एक मुहिम चलाए हुए हैं तथा अपने जीवन में आए इस बदलाव का श्रेय वह ब्रेकथ्रू संस्था को देते हैं। रामबीर मास्टर जी झज्जर ज़िले के राजकीय कन्या उच्च विद्यालय में अध्यापक हैं। इस स्कूल में लगभग साढ़े चार सालों से तारों की टोली* प्रोग्राम चल रहा है। रामबीर मास्टर जी का कहना है कि उनको पहले कभी यह अहसास ही नहीं हुआ था कि लड़का-लड़की के बीच कोई भेदभाव होता है, उनका तो यही मानना था कि यह एक सामान्य प्रक्रिया है, तथा हजारों वर्षों से चली आ रही है।

तारों की टोली प्रोग्राम में शामिल होने के बाद ही उन्होंने जाना कि वास्तव में लड़कियों के साथ जीवन के हर कदम पर भेदभाव होता है जोकि सरासर ग़लत है। उन्होंने जाना कि हमारे समाज में किस किस तरह से लड़का लड़की के बीच में भेदभाव होता है, जिसकी उन्होंने कभी कल्पना भी नहीं की थी। रामबीर जी ने कहा कि इस सीख से प्रभावित होकर उन्होंने अपने गांव के साथ साथ अन्य गाँवों में, जहां भी उनका आना जाना है, वहां लोगों को लैंगिक भेदभाव मिटाने के लिए प्रेरित किया।

रामबीर मास्टर जी खुद अपने गांव में भी व्यापक पैमाने पर भेदभाव मिटाने की मुहिम चला रहे हैं। कुछ महीने पहले भी उन्होंने अपने ही परिवार में श्रीकांत जी की बिटिया के जन्म पर, परिवार के लोगों से बातचीत करके कुआं पुजन** तथा समस्त ग्रामवासियों को भोजन करवाया। इसी दिशा में एक कदम और आगे बढ़ाते हुए उन्होंने अभी कुछ दिनों पहले दिनांक  21-10-2018 को उनके ही गांव में बिछराम जी की जुड़वा लड़कियों के जन्म पर कुआं पुजन तथा समस्त ग्रामवासियों को भोजन करवाया। भेदभाव मिटाने के लिए जो भी कार्य वह करते हैं उन्हें विरोध का सामना करना पड़ता है। लेकिन उनका कहना है कि कुछ भी हो, वह एक बराबरी के समाज के निर्माण के लिए यूं ही प्रयासरत रहेंगे।

* ब्रेकथ्रू द्वारा हरियाणा के स्कूलों में तारों की टोली कार्यक्रम चलाया जा रहा है। यह कार्यक्रम बच्चों को अपने जीवन में  लिंग आधारित भेदभाव और हिंसा की पहचान करने के लिए जीवन कौशल, बातचीत कौशल और निर्णय लेने की जागरूकता व समझ प्रदान करता है। इस कार्यक्रम में हमारे साथ स्कूल के कुछ शिक्षक भी जुड़े हुए है, जिन्हें हम ध्रुव तारा कहते हैं।

** हरियाणा में लड़को के जन्म पर थाली बजा कर ख़ुशियाँ ज़ाहिर की जाती हैं लेकिन लड़कियों के होने पर थाली नही बजाई जाती।

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