March 19, 2018
एक महिला का घर कौन सा होता है ?
कुछ सवालों के जवाब समाज या समुदाय के लिए स्वीकार्य नही होते। ऐसे अनेक मुद्दे हैं और उन मे से एक मुद्दा है महिला का पिता की संपत्ति मे अधिकार। भारत के परिवेश के अनुसार यह प्रशन या मुद्दों को समाज के बीच मे ले जाना एक बहुत बड़ी चुनौती...
Naiterpal
Singh
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कुछ सवालों के जवाब समाज या समुदाय के लिए स्वीकार्य नही होते। ऐसे अनेक मुद्दे हैं और उन मे से एक मुद्दा है महिला का पिता की संपत्ति मे अधिकार। भारत के परिवेश के अनुसार यह प्रशन या मुद्दों को समाज के बीच मे ले जाना एक बहुत बड़ी चुनौती है क्योंकि भारत एक पुरुष प्रधान देश है। पितृसता की नीव बहुत गहरी है और ये बाते बोलने के विरोध मे सारा समाज खड़ा हो जाता है।
ऐसा ही कुछ हमारे साथ भी हुआ। सोनीपत ज़िले मे 15 फरवरी से 24 फरवरी तक समुदाय मे नुक्कड़ नाटक के द्वारा संपत्ति मे महिला की हिस्सेदारी पर लोगों से गाँव गाँव जाकर हमने संवाद किया। महिलाऐं इस पक्ष में थी की पिता की संपत्ति में लड़की का हिस्सा होना चाहिए लेकिन पुरुष नहीं थे। कई गाँव मे तो पुरुषों ने कार्यक्रमों को बीच मे ही रुकवा दिया ओर कहा कि तुम तो हमारे घरों की बहू बेटियों को गलत शिक्षा दे रहे हो। संपत्ति का हकदार तो केवल पुत्र ही होता है। उनका कहना था की लड़की के लिए शिक्षा, दहेज, भात, झुझक सभी करते हैं तो पिता की संपत्ति मे बेटी का हिस्सा नहीं होना चाहिए।
एक गाँव मे कार्यक्रम के अंत मे एक लड़की हमारे टीम के पास आई। वह पूछी कि एक लड़की का घर कौन सा होता है? पिता के घर में तो उसको बचपन से शिक्षा दी जाती है कि वो पराया धन है। शादी के बाद अगर पति अच्छा ना मिले तो पति बोलता है की चल अपने बाप के घर जा,ये तेरा घर नहीं है। एक महिला का असली घर कौन सा होता है?
उसने फिर हमें अपने जीवन के बारे में बताया। उसके माता पिता नहीं हैं। शादी के बाद पति भी शराबी मिला ओर जब उन्हें एक लड़की हुई तो उसके पति ने उसे घर से निकाल दिया। वह अधिकतर अपने माइके ही रहती है। कभी भाई और बाकी परिवार वाले उसको ससुराल भेज भी देते हैं तो पति मारपीट कर के वापिस भेज देता है। अब वह दो साल से अपने भाई के पास ही रह रही है। उसका भाई भी उसका देखभाल नहीं करता। वह बोलता है कि इस लड़की को पति के पास छोड़ के आ जा ओर उसका पति बोलता है की यह मेरी औलाद नहीं है। उसने हमें बताया की वह भाई को बोलती है कि अब बेटी बड़ी हो रही है। उसे पढ़ाने लिखाने के लिए वह काम करना चाहती है, लेकिन भाई कहता है की कुछ करने की ज़रुरत नहीं है। दो रोटी खा ओर पड़ी रह।
अगर उसके पास कुछ पैसा, कुछ ज़मीन, कुछ संपत्ति उसके नाम होती तो शायद उसको ये बात नहीं सुननी पड़ती। उसका भी कोई अपना घर होता और शायद हर महिला का यही सवाल है कि उसका असली घर कौन सा है ओर क्या उसका अधिकार समान रुप से मिलता है? अगर वास्तव मे लड़की को समानता का अधिकार मिलना चाहिए तो समाज को संपत्ति मे भी बराबर अधिकार लड़की को देना चाहिए ताकि कल कोई महिला समाज मे ये सवाल ना पूछे कि महिला का घर कौन सा होता है?
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