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मीना (हरियाणा) द्वारा लिखित

कासनी गांव जिला झज्जर का एक छोटा सा गांव है। झज्जर जिले से इसकी दूरी 21 किलोमीटर की है। गांव की सरपंच वैसे तो महिला है लेकिन वह नाममात्र की सरपंच है, गांव मे विकास संबंधी सभी कार्य उसके ससुर देखते है इस गांव में हमारा कार्य जून 2018 से है तथा इस गांव में समुदाय तथा स्कूल दोनों में हमारा कार्य है। स्कूल में हम उज्जवल तारा तथा रोशन तारा संवेदीकरण पाठ्यक्रम के अन्तर्गत बच्चों को पढ़ाते हैं। 

यह कहानी हमारे एक रौशन सितारे की है जिसका नाम तमन्ना है। तमन्ना रौशन तारा क्लास मे नियमित रूप से आती थी तथा सैशन को सुनती थी लेकिन वह चुपचाप रहती थी, संकोची स्वभाव की थी। इस दौरान एक दिन ब्रेकथ्रू प्रतिनिधि ने तमन्ना से कहा कि हम आपके घर जाना चाहते हैं ताकि आपके मम्मी पापा भी हमारे प्रोग्राम से वाक़िफ़ हो सके। ऐसे में तमन्ना जो कि, उसने आव देखा ना ताव देखा तुरंत कहा ‘येस मैम! मैं आपको अपने घर ले जाना चाहती हूं।’ 

और हम चल दिए उसके घर। मैं जैसे ही उसके घर में अंदर गयी, तमन्ना ने सबसे कहा ‘यह हमारी तारों की टोली की मैडम है जो कि ब्रेकथ्रू संस्था से है।’ इसके बाद मैंने तमन्ना की मां से ब्रेकथ्रू के बारे में बताया और उसके दादाजी से काफी विस्तार से चर्चा की ब्रेकथ्रू के काम के बारे में। यह तमन्ना ने खुद अपने शब्दों में उन्हें बताया और इसके तुरंत बाद तमन्ना ने कहा ‘मैम आप जो कह रहे थे। पियर एजुकेटर की एक मीटिंग करनी है। वह आज ही मेरे घर में करिए मैं सभी को यही इकट्ठा करती हूं।’ मैने तमन्ना से पूछा कि ‘आप स्कूल में हमेशा चुपचाप क्यों रहती हो?’ इस पर तमन्ना ने कहा कि ‘ब्रेकथ्रू संस्था द्वारा दिए जाने वाले सैशन से प्रभावित होकर ही मुझ में बोलने की हिम्मत आई है तथा मेरा आत्मविश्वास बढ़ा है!’

इस तरह तमन्ना ने अपने मम्मी पापा से अनुमति लेकर पीयर ऐजुकेटर की ट्रेनिंग होने दी। वहां हमने एक पीयर एजुकेटर का ग्रुप बनाया तो तमन्ना की खुशी का ठिकाना नहीं था। कि उसके क्लास के लड़के लड़कियाँ आज उसके घर में बैठ कर बात कर रहे हैं इस मुद्दे पर कि शिक्षा को और बेहतर कैसे बनाया जाए। लड़कियाँ अपने सपनों को कैसे बुने और कैसे उन तक पहुंचे।

तमन्ना भी बीच-बीच में बोल रही थी, कि वह क्या बनना चाहती है, क्या करना चाहती है। और उसके दादाजी भी तमन्ना के चेहरे को देखते ही जा रहे थे। उसके बाद मेरा तमन्ना के घर जाना नहीं हुआ लेकिन फोन पर लगातार तमन्ना से और उसके परिवार वालों से मेरी बातचीत अक्सर होती रहती थी। हम सभी यह भी जानते हैं कि आज क्या दौर है जिससे हम गुज़र रहे हैं। इसी दौर के चलते मैंने एक दिन तमन्ना के घर फोन किया और इसी के साथ उसके परिवार से बात की कि एक ज़ूम मीटिंग है और तमन्ना को उस में शामिल होना हैं जो पूरे हरियाणा का किशोरियों की तरफ से प्रतिनिधित्व करेगी। जहां वो इस करोना महामारी में लॉक डाउन के चलते महिलाओं व लड़कियों के हालात कैसे हैं उन पर किस तरह से इस महामारी का प्रभाव पड़ रहा है, इन सब बारे में बात करे। खासकर किशोर व किशोरियों को लेकर तमन्ना इस कांफ्रेंस में शामिल हुई। तमन्ना ने बहुत आत्मविश्वास से अपनी बात सब तक पहुंचाई और हरियाणा का प्रतिनिधित्व किया। तमन्ना के परिवार वाले इस ज़ूम कांफ्रेंस को ख़ुशी के साथ बैठकर सुन रहे थे। जब शाम को मेरी उसके परिवार वालों से बात हुई, उसकी मां से बात हुई। तब उसकी मां की खुशियों का ठिकाना नहीं था और वह इतनी भावुक होकर रो पड़ी कि उन्होंने कहा आज घर में खाना बना हुआ रखा है। पर किसी का खाने का मन नहीं है। क्योंकि सबको इतनी बड़ी खुशी उनकी बेटी ने दी और उनकी मां बार-बार संस्था का आभार व्यक्त कर रही थी। उन्होंने बताया कि उसके दादाजी ने आज खाना नहीं खाया और कहा कि ‘आज मेरी पोती तमन्ना ने मेरा पेट भर दिया है।आज मैं बहुत खुश हूं।और उसी की खुशी के साथ ऐसे ही सोना चाहता हूं।’

ब्रेकथ्रू संस्था के प्रभाव से बहुत बड़ा बदलाव तमन्ना के परिवार में देखने को मिला और तमन्ना भी इस बदलाव से बहुत ज्यादा खुश है ।तमन्ना ने कहा कि उसके पापा 6:00 बजते ही घर में सोने के लिए चले जाते थे। आज वह रात 9:00 बजे तक नहीं गए तो उनकी मम्मी ने पूछा, तब तमन्ना के पिताजी ने कहा ‘आज मैं कुछ समय बच्चों के साथ बिताना चाह रहा हूं’ तमन्ना का आत्मविश्वास बढ़ता गया तथा तमन्ना के परिवार वालों का हौसला और बुलंद होता गया। और इसी हौसले के साथ तमन्ना ने एक और नया कार्य करने की ठानी। उसने इसकी शुरुआत अपने सहपाठी हिमांशु के साथ मिलकर की। 

पीयर एजुकेटर तारों की टोली के विद्यार्थियों ने समुदाय के साथ गांव के गणमान्य लोगों के साथ मिलकर कुछ कार्य करने की सोची। लेकिन वह यह नहीं समझ पा रहे थे कि कैसे क्या करे ताकि गांव के लोगों का भला हो सके क्योंकि इस समय गांव मे कोरोना का प्रकोप छाया हुआ है। तथा लोगो में भय भी बना हुआ है तब ब्रेकथ्रू प्रतिनिधि ने उन्हें सलाह दी कि ऐसे समय मे अगर वह लोगों को सूती कपड़े का बना मास्क उपलब्ध करवा दें ताकि लोग अपना बचाव कर सके। तो हमारी बात से तमन्ना व गांव के अन्य लोग प्रभावित हुए और उन्होने मास्क सिलने का कार्य किया और अपने गांव को महामारी से बचाने कि मुहिम में जुट गए।

ऐसा करते वक्त उनकी कुछ चिंता बढ़ गई कि अब हम और सूती कपड़ा कहां से लेकर आएंगे ताकि से यह मास्क बनाए जाएं। तब तुरंत तमन्ना ने कहा कि मेरे दादाजी भी इस काम में हमारी मदद करेंगे।और वह गांव के गणमान्य लोगों को कपड़ा डोनेट करने के लिए कहेंगे। गांव में कपड़े वालों की दुकानें साथ ही झज्जर जिले की दुकानें और कासनी गांव के ही बाशिंदे सबके साथ बात की गई और मास्क बनाने के कार्य को आगे बढ़ाया गया। अभी यह कार्य लगातार जारी है। अभी पीयर एजुकेटर के परिवार बहुत खुश हैं कि वह समाज में इतना बड़ा योगदान दे रहे हैं। इसी के साथ हिमांशु की बहन एक टीम का गठन करेगी जो मास्क सिलने का कार्य करेंगी। वह मास्क गांव के लोगों के बीच में वितरण करेंगे। इसके बाद हमारी बात तमन्ना के दादा जी से हुई जो कि यह सुनकर बहुत खुश हुए कि संस्था ने बच्चों को प्रभावित किया ताकि सभी में सामाजिक भावना के साथ महामारी के समय मिल काम किया। 

कहानी यहां नहीं ख़तम होती। तमन्ना और हिमांशु ने मिलकर अपने दादाजी की मदद से स्कूल प्रिंसिपल से बात करके स्कूल के दो कमरों को खुलवाने की अनुमति भी लेने का कार्य किया ताकि बच्चे अपनी पढ़ाई कर सके।

इस तरह तमन्ना के मम्मी पापा ने कहा कि ब्रेकथ्रू संस्था के कारण उनकी बेटी तमन्ना में बदलाव आया है तथा चुपचाप रहने वाली, संकोची स्वभाव वाली उनकी बेटी अब निर्भिकता से अपनी बात रखती है, अपने सपनों पर चर्चा करती है और अपने अधिकारों की बात करती है। तथा अन्य बच्चों को भी मोटिवेट कर रही है उनके

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